सीरियल शूटिंग में ड्रोन कैमरे का उपयोग पक्षियों की मरने की चर्चा जोरों पर?

सीरियल शूटिंग में ड्रोन कैमरे का उपयोग पक्षियों की मरने की चर्चा जोरों पर?

मोंटी वर्मा ,की रिपोर्ट पृथ्वीपुर ……ड्रोन कैमरे से हुई शूटिंग कई पक्षी और जानवरों की मौत की चर्चा अधिकारी मस्ती में है मस्त जी हां हम बात कर रहे हैं निवाड़ी जिले के पर्यटक स्थल ओरछा की जहां पर वन अभ्यारण में एक सीरियल की शूटिंग हो रही है और जिसकी परमिशन वन विभाग द्वारा दी गई है शूटिंग का समय सुबह 8:00 बजे से शाम 5:00 बजे का दिया गया है लेकिन अधिकारियों की मिलीभगत के चलते शूटिंग देर रात की अभ्यारण में चल रही है डॉन कैमरे का उपयोग सीरियल की शूटिंग उपयोग किया गया है सूत्रों का कहना है की डोन कैमरे के उपयोग से जो पक्षी रात में घोसला में चले गए थे वह आवाजऔर घबराकर केघोसले से बाहर निकल आए जिससे उनकी मौत हो गई है इस बात की चर्चा पूरे ओरछा नगर में हैं ओरछा के रहने वाले राम नरेश कहते हैं कि ड्रोन कैमरे को उपयोग करने से जहां छोटे पक्षी टकराए हैं वहीं जानवरों ने रात्रि में अपने आशियाने छोड़ कर दौड़ लगा दी है ………क्या कहते हैं जानकार ……जंतु विज्ञान के प्रोफेसर डॉ सुमित बनर्जी कहते हैं सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार वन अभ्यारण में किसी तरह के कोलाहल की स्वीकृति देना गैरकानूनी है कोलाहल से अभ्यारण में रह रहे पक्षी और जानवरों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है खासकर के रात के समय में इस तरह की अगर घटनाएं होती हैं तो है पक्षियों जानवरों के लिए ठीक नहीं है जिले के डीएफओ……… चंद्रशेखर सिंह कहते हैं कि हां परमिशन तो दी गई है अगर इस तरह का मामला है हम दिखाते हैं वह कोई अपनी जिम्मेदारी का जवाब गोलमाल दे रहे हैं अगर हम सूत्रों की माने वन विभाग के आला अधिकारियों को अंधेरे में रहकर रखकर निचले स्तर पर काम करने वाले 1 अधिकारियों ने ही सीरियल निर्माताओं से मैनेज होकर अनाधिकृत शूटिंग करने की स्वीकृति दी है क्यों नहीं हो रही है कार्यवाही सबसे बड़ा सवाल यहां पर यही खड़ा होता है कि आखिरकार पक्षियों जानवरों की सुरक्षा की जिनके कंधों पर जान जिम्मेदारी है वोआखिर गोलमाल जवाब क्यों दे रहे हैं उस सीरियल शूटिंग को ओरछा अभ्यारण में रोका क्यों नहीं जा रहा है यह सवाल है जो आमजन वन विभाग के अधिकारियों से जानना चाह रहे हैं 2 दिन की मिली थी शूटिंग करने की इजाजत वन विभाग द्वारा सीएल निर्माण कंपनी को 2 दिन शूटिंग करने की इजाजत दी गई थी लेकिन पत्र में इस बात का उल्लेख नहीं किया गया है कि शूटिंग दिन में होगी या रात में भले ही कानून के हिसाब से 1 अभ्यारण में शूटिंग रात में बंद हो लेकिन पूछा किस अभ्यारण में सारे नियमों को ताक पर रखकर जहां ड्रोन कैमरे का उपयोग किया गया देर रात्रि तक खुलेआम शूटिंग चलती रही

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