युबक की करेंट से हुई मौत ।

युबक की करेंट से हुई मौत ।

>   ।आदिवासी युवक की करेंट लगने से मौत।
>
> ।ग्रामीणों के दबाव में शव को पोस्टमार्टम केंद्र पर छोड़ घटनास्थल पर जाकर कार्यवाही शुरू।
>
> ओरछा—-थाना क्षेत्र अन्तर्गत आने बाले ग्राम रजपुरा में खेत पर काम कर रहे एक आदिवासी युवक को करेंट लग जाने से मौत हो गई।खेत मालिक द्वारा इस मामले की सूचना परिजनों को ना देकर चकरपर चौकी प्रभारी से साठगाँठ कर सीधे शव को पोस्टमार्टम को ओरछा भेजे जाने की जानकारी लगते ही बुढेरा रजपुरा के सैकड़ो लोग ओरछा थाने पहुँचे जहाँ पोस्टमार्डम के पूर्व मौके मुआयने के साथ शव को घटना स्थल पर ले जाने की जिद करने लगे मामला बिगड़ता देख चौकी प्रभारी शव को छोड़ मौके पर गये तब मामला शांत हुआ और आगे की कार्यवाही शुरू कर दी गई।
> जानकारी के अनुसार बुढेरा मंडोर पश्चिमी निवासी करीव 28 वर्षीय मनोज पुत्र हिम्मा आदिवासी रजपुरा के भरत लोधी के यहाँ खेती किसानी का काम करता था मृतक के परिजनों के अनुसार आज दोपहर उनको सूचना मिली कि उनके भाई मनोज की करेंट लगने से मौत हो गई और उसका शव ओरछा थाने के पोस्टमार्डम हाउस पर रखा है जानकारी लगते ही बुढेरा रजपुरा के सैकड़ो आदिवासी एवम अन्य लोग ओरछा थाने पहुँचे ओर इस पूरे मामले पर विरोध करने लगे।हालांकि चौकी प्रभारी मृतक के परिजनों से पोस्टमार्टम करने की बात करते रहे लेकिन ग्रामीणों के विरोध के आगे मामला बिगड़ते देख शव को पोस्टमार्डम केंद्र छोड़ घटना स्थल पर जाकर मामले को शांत किया गया।
>
>        ।चौकी प्रभारी की भूमिका सन्दिग्ध।
>
> इस पूरे मामले में चकरपर चौकी प्रभारी श्री परिहार की भूमिका सन्देह के घेरे में है चौकी प्रभारी के अनुसार वह ओरछा थाने पर थे तभी बुढेरा सरपंच ने बताया कि मनोज आदिवासी करेंट से बेहोश हो गया था जिसे उपचार को खेलार ले जाया गया जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया तो मैने सोचा कि शव को सीघे यही मंगाकर आगे की कार्यवाही कर शव को पोस्टमार्डम के बाद परिजनों के सुपुर्द कर आगे की कार्यवाही शुरू की जावेगी।वही ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें जब जानकारी मिली जब शव ओरछा थाने पहुँच गया था जबकि घटना स्थल पर पंचनामा बनाना चाहिये था मौका मुआयना भी करना चाहिये था लेकिन इस कुछ भी नही किया गया इसलिये यह पूरा मामला संदिग्ध लग रहा था।हालांकि ग्रामीणों के विरोध के बाद पुलिस ने मामला बिगड़ते देख शव को मौके पर छोड़ घटना स्थल पर जाने में ही अपनी भलाई समझी तब जाकर मामला शांत हुआ।

बुन्देलखण्ड