बेहमई कांड के लिए फूलन ने जगम्मनपुर से किए थे 6अपहरण

बेहमई कांड के लिए फूलन ने जगम्मनपुर से किए थे 6अपहरण

राकेश द्विवेदी , उरई

आज से ठीक 37 वर्ष पूरे हो रहे हैं , जब जज़्बातों से घायल फूलन देवी ने जगम्मंनपुर में आकर धावा बोला था । 22 दिसंबर सन 1980 का वह साल था । सोमवार की शाम होने के करीब थी । करीब 4 बजे फूलन देवी ने बाबा मुस्तक़ीम और मान सिंह समेत 35 डकैतों साथ यमुना नदी के किनारे से होकर रियासत के गाँव में निडर होकर घुस आई थी ।इस घटना को उस वक्त अंजाम दिया गया जब डकैतों के खिलाफ पी ए सी कांबिंग अभियान चलाये हुए थी और यहाँ दो ट्रक पी ए सी डेरा डाले थी । फूलन अपने हाथों में राइफल संभाले दनादन फायर पे फायर किए जा रही थी । वह लाउड इन्हेलर से चिल्ला – चिल्लाकर न जाने क्या – क्या कह रही थी । उस आवाज में कुछ गालियां भी शामिल थीं । इससे पीएसी जवानों का भी साहस डिग गया । उस दिन तो किले की बंदूकें भी अपना प्रभाव नही छोड़ पाई । माथे पर लाल रंग की पट्टी बांधे फूलन देवी को लोगों ने तब पहली बार देखा था । अभी तक सिर्फ उसका नाम ही सुना गया था। उस वक्त की घटना के समय डरी – दुबकी महिलाओं के दिमाग में आज तक फूलन का अक्श कायम है ।
गोलियों की तड़तड़ाहट सुन पूरे बाजार में हड़कंप मच गया था । दुकानदार दुकान खुली छोड़कर भागने लगे । भागने के दौरान ही साहब खाँ की जांघ में गोली आकर धंस गई । जितनी भी जेवरों की दुकाने खुली मिली उनको लूट लिया गया । इस दौरान गाँव के ही 6 लोगों का अपहरण कर लिया गया । जिले में अपहरण की यह पहली घटना थी । उस समय जिनका अपहरण हुआ वे थे – नाथूराम दुबे , रामगोपाल सोनी , सुरेश सोनी , अरविंद सोनी , लल्लू दुबे , रूप सिंह यादव । इनमें अब नाथूराम दिवंगत हो चुके हैं । सबसे ज्यादा फिरौती नाथूराम से 60 हजार वसूली गई थी । राम गोपाल और सुरेश से 50-50 हजार वसूले गए थे । लल्लू राम की माली हालत ठीक न होने से उन्हें मुफ्त में और रूप सिंह को 25 हजार देने पड़े ।
उस समय आस पास के बीहड़ों में डकैतों का बोलबाला था । बाबा घनश्याम , लालाराम – श्रीराम , विक्रम मल्लाह , मुस्तक़ीम , फक्कड़ , मलखान , फूलनदेवी , कुसुमा नाइन और मान सिंह जैसे दुर्दांत डकैतों की ताबड़तोड़ वारदातों से प्रदेश सरकार हिल गई थी ।
विक्रम के लालाराम – श्रीराम द्वारा धोखे से मार दिये जाने पर भयभीत फूलन ने बाबा मुस्तक़ीम के गिरोह में शरण ली थी । वह लालाराम – श्रीराम द्वारा की गई बेइज्जती और धोखे का इंतकाम लेना चाहती थी । तब मुस्तक़ीम ने उसका नया गिरोह बनवाने में मदद की थी । जगम्मंनपुर की बाजार लूटपाट व अपहरण की घटना की बाद फूलन देवी ने बेहमई कांड को अंजाम दिया था । 14 फरवरी 1981 को फूलन ने गाँव को घेरकर 21 लोगों को बंधक बनाया था । सभी को गाँव के बाहर ले जाकर 20 लोगों को गोलियों का निशाना बनाया गया । इस गाँव में ही लालाराम -श्रीराम पनाह पाते थे इसलिए यहाँ के मुख्य तौर पर ठाकुरों को निशाना बनाया गया था ।

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