पत्नी से किया बादा, जहर खाकर पति ने दी जान।

पत्नी से किया बादा, जहर खाकर पति ने दी जान।

साठ के दशक में पत्नी को दिया वचन निभाया
वृद्धा की मौत के बाद 75 साल के वृद्ध ने जहर खाकर दी जा

दमोह mp पति-पत्नी एवं प्रेमी युगल की अमर कहानियां हमें अक्सर हमने सुनी हैं लेकिन एमपी में बसे बुंदेलखंड क्षेत्र के दमोह जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें एक 75 साल के वृद्ध पति ने साठ के दशक में अपनी पत्नी को दिया वचन निभाते हुए उसकी मौत पर खुद की जान दे दी। 75 साल के वृद्ध ने अपनी पत्नी की मौत के बाद जहर खाकर जान दे दी। पत्नी का अंतिम संस्कार हो ही नहीं पाया था। कि इधर पति की अंतिम सांसे चलने लगी थी और आखिरकार सुबह पत्नी का अंतिम संस्कार हुआ और देर रात पति की मौत हो गई। दरअसल साठ के दशक में शादी होने के बाद वृद्ध दंपत्ति एक दूसरे से इतना प्यार करते थे कि उन्होंने हमेशा साथ रहकर खाना खाया पति के घर आने तक पत्नी भूखी रही और बेटों के होने के बाद भी पत्नी की अंतिम समय में तबीयत बिगड़ने पर उसकी सेवा भी पति ने ही की। यह पूरा मामला दमोह जिले के तेजगढ़ थाना क्षेत्र के इमलिया गांव का है। जहां पर सोमवार को एक वृद्धा की देर रात मौत होने के बाद मंगलवार सुबह वृद्ध पति ने जहर खाकर जान देने का प्रयास किया था जिसकी मंगलवार देर शाम मौत हो गई।
६० के दशक में वैवाहिक गठबंधन में बंधे जोड़े में इतना प्रेम उमड़ा कि दंपति हर पल एक दूसरे का साथ देने लगे। बिना पति के आए पत्नी ने कभी खाना नहीं खाया। अगर पति गांव से बाहर रहा तो बात अलग है नहीं तो जब तक पति घर पर नहीं आए कभी भी महिला ने अकेले खाना नहीं खाया। दंपति जब वृद्धावस्था में पहुंच गई तब भी पति सभी को मना करते हुए स्वयं उसकी देखरेख में लगा रहा। इस अनूठे प्रेम की कहानी जो भी सुनता तो बस वर्तमान के लोगों को इस दंपति का उदाहरण देने से नहीं चूकता। बात यहां खत्म नहीं हुई। सोमवार १७ सितंबर की रात जब ७० साल की अवस्था में पहुंच चुकी पत्नी का निधन हो गया तो 75 साल का पति इस घोर संकट से अपने आप को उबार नहीं पा रहा था। बिना पत्नी के अपने आप को अकेला पाकर दाह संस्कार के पहले ही उसने अपने प्राण त्यागने का प्रयास किया। जिसने मंगलवार सुबह घर पर ही बिना किसी की जानकारी के जहर खाकर जान देने की कोशिश की। लेकिन परिवार में रहने वाले दो बेटों सहित बहू व अन्य को पता चला तो उन्होंने तत्काल ही जिला अस्पताल में भर्ती कराया। जिनकी मंगलवार देर रात इलाज के दौरान मौत हो गई।

जिले के तेजगढ़ थानांतर्गत इमलिया घाट निवासी डाल सिंह पिता मुलू सिंह लोधी (75) की पत्नी कुंती बाई लोधी (70) को लकवा लगने के बाद सोमवार रात कुंती बाई का निधन हो गया था। जिनका अंतिम संस्कार मंगलवार सुबह होना था। लेकिन कुंती बाई के निधन होने के बाद डाल सिंह अपने आप को सम्हाल नहीं पा रहे थे। जिन्होंने मंगलवार सुबह कुंती बाई का अंतिम संस्कार होने के पहले ही जहर खाकर जान देने की कोशिश की और आखिरकार मंगलवार देर रात वृद्धि की भी मौत हो गई।
एक दूसरे के बिना कभी नहीं रहे-
दमोह में मारूताल में पदस्थ सचिव चित्तर सिंह ने जिला अस्पताल में पत्रिका को बताया कि उनके बड़े पिता डालसिंह व बड़ी मम्मी कुंती बाई एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे। जीवन के अंतिम पड़ाव के बीच जब कुंती बाई को लकवा लगा तो भले ही उनके दो बेटे और दो बहुएं उनकी देखरेख करती हों। लेकिन बड़े पिता उनकी सेवा करने में कोई कमी नहीं रखते थे। संयुक्त परिवार में रहने वाली बुजुर्ग दंपती एक दूसरे के पूरक बने हुए थे। कुंती के निधन का असहनीय दर्द झेल रहे बड़े पिता ने उनके गम में जहर खाकर जान देने की कोशिश की और आखिरकार वृद्ध पति की मंगलवार देर रात अंतिम सांस थम गई

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