ओ.टी. मे रंगे हाथों पकडी गई डाॅक्टर लता लक्ष्मी।

ओ.टी. मे रंगे हाथों पकडी गई डाॅक्टर लता लक्ष्मी।

सीएमएचओं की कार्यवाही संदेह के घेरे मे।
टीकमगढ़ ………… हमेशा विवादो मे रहने बाली जिला चिकित्सालय मे पदस्थ महिला चिकित्सक डाॅक्टर लता लक्ष्मी को सिविल लाईन मे संचालित एक निजी नर्सिंग होम मे रात्रि 11 बजे आपरेशन करते हुये सीएमएचओ ने रंगे हाथो पकडा है। सीएमएचओ कहती हे कि कार्यवाही की जा रही है। जब एक सरकारी चिकित्सक निजी अस्पताल मे रंगे हाथों पकडा जाता है तो फिर कार्यवाही मे इतनी देर क्यों यह कई संदेहो को जन्म देता है।
स्वास्थ्य अधिनियम के तहत कोई भी शासकीय चिकित्सक निजी नर्सिंग होम मे प्रैक्टिस नही कर सकता है। इसके बाद भी बीती रात्रि जिला चिकित्सालय मे पदस्थ महिला चिकित्सक डाॅ लता लक्ष्मी को सिविल लाईन मे स्थित सेवा नर्सिंग होम मे रंगे हाथों जहां वह रुपये लेकर एक महिला का आपरेशन कर रही थी, यह पहला मौका नही है इसके पहले भी वह रुपयों की लालच में प्राईवेट नर्सिंग होमो ंमे अपनी सेवाये दे रही है।
महिला की मौत से जुडा है डाॅ लता लक्ष्मी का नाता………।
आज से दो साल पहले टीकमगढ़ जिले के लिधौरा नगर मे नसबंदी शिविर का आयोजन किया गया था जिसमें सीमा सेन का नसबंदी आपरेशन डाॅ लता लक्ष्मी द्वारा किया गया था जिसकी आपरेशन के बाद मौत हो गई थी यह मामला भी तत्काल सुर्खियों मे आया और खत्म हो गया। इस मामले मे पीडित परिजनों ने डाॅ के उपर गलत आपरेशन करने का आरोप लगाते हुये शिकायत भी की थी लेकिन चंद रुपयों की लालच मे अधिकारियों ने इस मामलो को रफा दफा कर दिया था।
क्या कहते है अधिकारी…………।
टीकमगढ़ जिले की सीएमएचओं डाॅ बर्षा राय कहती है कि मैने और मेरी टीम ने डाॅ लता लक्ष्मी को सेवा नर्सिंग होम मे आपरेशन करते हुये रगंे हाथों पकडा है। लेकिन कार्यवाही के नाम पर वह कहती है कि हम नोटिस दे रहे है। सबाल यहा यह खडा होता है कि जब शासकीय चिकित्सक को यहां खुद सीएमएचओ ने रगें हाथो पकडा है तो नोटिस देने का क्या मतलब सीधी कार्यवाही क्यों नही की जा रही है। सीएमएचओं के इस बयान से उनकी कार्यवाही पर लोग संसय खडा कर रहे है क्योंकि इस पूरी कार्यवाही की बीडियोग्राफी सीएमएचओं डाॅ बर्षा राय द्वारा कराई गई है।
पूर्व सीएमएचओं ………… डाॅ अशोक गुप्ता का कहना है कि जब कोई शासकीय चिकित्सक निजी नर्सिंग होम मे इलाज करते हुये पकडा जाता है तो उस पर तुरंत निलंबन की कार्यवाही की जाती है। अगर नही हो रही है तो अधिकारी फिर मामले को दबाने का प्रयास कर रहे है।

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