पन्ना। दशकों से बुनियादी और मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे ग्रामवासियों को अब प्रशासनिक अधिकारियों और नेताओं पर भरोसा नहीं है। इनके द्वारा इन भोले-भाले ग्रामीणों का भरोसा इतनी मर्तबे तोड़ा गया है कि अब वे अधिकारियों और नेताओं द्वारा दिये जाने वाले आश्वासनों पर भरोसा करना छोड़ दिया है। ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा और व्यथा वादा खिलाफी करने वाले नेताओं व अधिकारियों को सुनाने के बजाय एक नायाब तरीका ढूँढ़ा है। उन्होंने संकट मोचन हनुमानजी के दरबार में पहुँचकर समस्याओं से निजात दिलाने के लिये न सिर्फ प्रार्थना की अपितु उनको बकायदे एक ज्ञापन भी सौंपा है, जिसमें ग्राम की समस्याओं का जिक्र किया गया है।
उल्लेखनीय है कि पन्ना जिले के गुनौर जनपद की ग्राम पंचायत बिल्हा का मजरा हनुमतपुरा व ग्राम पंचायत सरहंजा का मजरा उड़की आज भी पहुँचमार्ग से वंचित हैं। बारिश के मौसम में इन दोनों ही ग्रामों के लोगों का जीवन कष्टप्रद और नारकीय हो जाता है। इसकी वजह यह है कि बारिश होने पर तीन-चार किमी का मार्ग कीचड़ से लथपथ हो जाता है, फलस्वरूप किसी भी तरह के वाहनों से आवागमन संभव नहीं होता। ऐसी स्थिति में कीचड़ भरे रास्ते से पैदल निकलना ही एक मात्र विकल्प बचता है। यही वजह है कि बारिश के मौसम में दोनों ही गाँव एक तरह से पहुँच विहीन हो जाते हैं। विगत कई दशकों से यह मुसीबत झेल रहे ग्रामीणों ने न जाने कितनी बार अपनी समस्यायें आला अफसरों व स्थानीय जनप्रतिनिधियों को सुनाईं और समस्याओं के निराकरण हेतु उनसे अनुरोध किया। लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला जो आज तक पूरा नहीं हो सका है। थक हारकर ग्रामीणों ने अब यह तय किया है कि अफसरों और नेताओं के पास जाकर गिड़गिड़ाने के बजाय क्यों न उसके सामने हाँथ जोड़कर प्रार्थना की जाये जो सबके संकट का हरण करने वाले हैं। इसी अभिनव सोच के तहत ग्रामीणों ने संकट मोचन हनुमान जी के दरबार में जाकर हाजरी देकर उनसे समस्याओं का निराकरण कराने की प्रार्थना की है और ज्ञापन सौंपा। अब देखना यह है कि पीडि़तों, वंचितों और भक्तों को हर तरह के संकट से उबारने वाले संकट मोचन बजरंग बली हनुमतपुरा गाँव के लोगों की प्रार्थना सुनकर उन्हें उनकी समस्या से कब तक निजात दिलाते हैं। हनुमतपुरा गाँव के ईश्वर प्रसाद पटेल का कहना है कि उन्हें पूरा भरोसा है कि अफसरों और नेताओं ने हमारी व्यथा भले ही नहीं सुनी लेकिन हनुमान जी जरूर हमारी समस्या दूर करने के लिये कोई न कोई जतन करेंगे। ज्ञापन सौंपने वालों में ईश्वर प्रसाद पटेल, जय कुमार, प्रितपाल पटेल, महेन्द्र पटेल, जय प्रकाश, शुभम, राजकिशोर, रामभगत, अनुज पटेल, रमाकान्त, मुकेश, धीरू, व नरेश पटेल मुख्य रूप से शामिल रहे।

कीचड़ वाले मार्ग से स्कूल जाते हैं बच्चे

पहुँचमार्ग न बन पाने के कारण सबसे ज्यादा मुसीबत स्कूली बच्चों व बीमार व्यक्तियों की होती है। हनुमतपुरा गाँव के बच्चों को पढऩे के लिये ग्राम पंचायत बिल्हा स्थित माध्यमिक शाला में जाना पड़ता है। जाहिर है कि बारिश के मौसम में जब गाँव का रास्ता कीचड़ से सन जाता है तो बच्चों को भी इसी रास्ते से होकर पैदल स्कूल तक की तकरीबन 3 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। हनुमतपुरा गाँव से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र गुनौर की दूरी लगभग 10 किमी है। ऐसी स्थिति में गाँव का कोई व्यक्ति यदि बारिश के मौसम में बीमार पड़ता है तो उसे समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाती, जिससे कई मर्तबे बीमार व्यक्ति की असमय मौत तक हो जाती है।

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