राकेश द्विवेदी उरई ।

जालौन जिले की तीन महिलाएं ऐसी हैं जिन्होने पहले अलग – अलग कारणों से सुर्खियां ईजाद की , इसके बाद देश की सबसे महत्वपूर्ण संस्था का हिस्सा बनीं । सुख की यह अनुभूति सबसे पहले राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने कराई इसके बाद संघर्ष के रास्ते से गुजर कर ज़िंदगी की नई राह की ओर लौटी फूलन देवी और अब यह मौका साध्वी प्रज्ञा राजावत ने अपने जनपदवासियों को दिया है ।

विजया राजे जब तक जीवित रहीं उन्होने उरई से अपना रिश्ता मायके वाला ही बनाए रखा । उनके पिता महेंद्र सिंह अंग्रेजों के समय यहाँ पर डिप्टी कलेक्टर थे और आजीवन वह यहीं रहे । इस वक्त सुरेन्द्र सिंह मोना अपने परिवार के साथ उसी मकान में रह रहे हैं । जब भी उरई से कोई ग्वालियर गया उसे राजमाता से मायके वाला ही अपनत्व मिला । वह अपनी दूसरी माँ को देखने भी अक्सर यहाँ आती रहती थीं । जिले के लोग भी उन्हें बेटी जैसा सम्मान देते रहे । उनकी राजनीति कांग्रेस के साथ शुरू हुई पर अपने सैद्धांतिक मूल्यों के कारण बाद में वह जनसंघ में शामिल हुईं । भाजपा को बनवाने में भी उनका काफी सहयोग रहा और वह पार्टी के संचालन के लिए काफी आर्थिक मदद भी करती रहीं थीं । सबसे पहले वह 1957 में सांसद बनी थीं । अंतिम बार 1991 में पाँचवी बार सांसद बनीं । फिर स्वास्थ्य कारणों से चुनावी राजनीति से खुद को अलग कर लिया । राजमाता ने जनता की सेवा को गुना क्षेत्र चुना था। जब उनका प्रेम विवाह ग्वालियर के महाराज जीवा जी के साथ हुआ तो इस जिले को भी महत्व मिला ।
कालपी क्षेत्र के शेखपुर गुढ़ा की रहने वाली फूलन देवी की ज़िंदगी कई हिस्सों में बंटी है । गरीबी से बचपन घोर मुफलिसी में बीता , फिर नए किस्म का संघर्ष शुरू हो गया । वह बीहड़ से जेल तक पहुंची । जेल से रिहाई के बाद सपा के तत्कालिक मुखिया मुलायम सिंह यादव ने उन्हें मिर्जापुर से लोकसभा का चुनाव लड़वाया । वह 1996 में पहली बार सांसद बनकर दिल्ली पहुंची । तब दुनिया भर में उनके सांसद बनने की चर्चा हुई थी । इसके बाद 1999 में वह दूसरी बार मिर्जापुर से सांसद बनी । 25 जुलाई 2001 को जब उनकी हत्या हुई , तब वह सांसद ही थीं । विजया राजे और फूलन देवी के साथ ज़िंदगी की समानता इस रूप में जुड़ी है कि जिले की इन दोनों बेटियों की म्रत्यु 2001 में ही हुई थी । राजमाता जनवरी में नहीं रहीं और फूलन की जुलाई में हत्या कर दी गई ।
अब बात साध्वी प्रज्ञा ठाकुर की । उनका मूल गाँव नदीगांव ब्लाक का परावर है । उनका बचपन यही बीता । मालेगांव ब्लास्ट के बाद उनका नाम आरोपी के रूप में जुडने से साध्वी की चर्चा देश भर में हुई । इस दौरान उन्हें कड़ी यातनाएं भी सहनी पड़ी । भोपाल से भाजपा ने साध्वी को पूर्व मुख्य मंत्री दिग्विजय सिंह के खिलाफ उतारा । उन्होने तीन लाख से भी ज्यादा वोटों के अंतर से राजनीति के इस पुरोधा को हरा दिया । इस वक्त विश्व भर में साध्वी की इस चुनावी सफलता की चर्चा हो रही है । कई विदेशी अखबारों के पहले पन्ने पर उन्हें स्थान मिला है ।
उनकी इस कामयाबी पर परावर सहित पूरा जिला इतरा रहा है । हर कोई इस कामयाबी पर अपने – अपने ढंग से खुशियाँ मना रहा है । सोशल मीडिया पर उनके फोटो खूब प्रयोग में लाकर जिले के अस्तित्व से जोड़कर देखा जा रहा है ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here