लॉक डाउन और मजदूर पार्ट वन

बुंदेलखंड में लॉक डाउन और मजदूर …(डॉ नरेन्द्र अरजरिया)……पार्ट 1 कोरोनावायरस में गर्भवती महिलाओं की हालत दयनीय नमक रोटी खा कर कर रही है गुजारा …?…………शासन के लाख दावे और बुंदेलखंड की हकीकत एक दूसरे के सामने दुश्मन की तरह खड़े हैं चित्रकूट जनपद की ग्राम पंचायत अकबरपुर जहां गर्भवती माताएं नमक रोटी खाकर अपने दिन व्यतीत कर रहे हैं इसे शासन और समाज पोषण की संज्ञा देता है बस्तियों में ना तो लोगों के मुंह पर मास्क है ना ही हाथ धोने के लिए साबुन जबकि यही मजदूर यहां पर खनिज उद्योग पतियों को करोड़पति बना रही है गर्भवती पूजा कहती है लॉक डाउन के चलते घर में पैसा नहीं बचा है पति मजदूरी करता है लेकिन काम बंद है मालिक के दरवाजे भी बंद है अगर बाहर जाओ तो पुलिस के डंडे उनका इंतजार करते हैं ऐसी एक महिला नहीं करीब इस बस्ती में 20 से 25 महिलाएं हैं इन्हें पानी दूर हैंडपंप से लाना पड़ता है सरकार और प्रशासन अखबार और टेलीविजन में बड़े-बड़े दावे कर रही है लेकिन यह दावे कितनी सच है इस बस्ती से उजागर हो रहे हैं ए सभी महिलाएं खनिज में काम करने वाले मजदूरों की पत्नियां हैं इनके हालातों पर मुझे कवि साधना जोशी की 4 लाइन याद आती है…………………………………………………कफन के लिए उसके परिवार वाले न तड़फे
बिमारी में वह काफी तलाष न करे
कुछ दिनों की छुट्टी उसे भी मिल जाये
इस घरा पर कुछ एक रुपता बन जाये
मजदूर भी प्रगति के युग में इन्सान बन जाये
हर इन्सान उनके लिए भी भगवान बन जाये । (फोटो और जानकारी समाजसेवी अभिमन्यु भाई की पोस्ट से ली गई है)

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