मनरेगा का कार्य मशीनों से

मजदूरों की जगह मशीन से हो रहा निर्माण कार्य
बमोरी कला (टीकमगढ़)

जिला प्रशासन के तमाम प्रयासों के बाद भी ग्रामीण अंचलों में मनरेगा योजना के तहत संचालित निर्माण कार्यों में मजदूरों को रोजगार नहीं मिल रहा है और मजदूरों की जगह जेसीबी मशीन और ट्रैक्टर से निर्माण कार्य कराया जा रहा है ।
जबकि मास्टर रोल में मजदूरों के नाम दर्ज किए जा रहे हैं।
एक ऐसा ही मामला जनपद पंचायत पलेरा की ग्राम पंचायत भगवंतपुरा मैं देखने को मिल रहा है ।
जहां पर शासन के नियमों को दरकिनार कर मनरेगा योजना के निर्माण कार्य में जेसीबी और राजस्थानी ट्रैक्टरों का उपयोग कर तलैया का निर्माण कार्य ग्राम पंचायत के द्वारा कराया जा रहा है ग्रामीणों ने इस मामले की शिकायत जिला प्रशासन से की गई और मामले की जांच कराने की मांग की है।
तथा ग्रामीणों ने यह भी बताया कि जब तलैया का निर्माण कार्य मनरेगा योजना के तहत जेसीबी मशीन से और ट्रैक्टरों से कराया जा रहा है जिसमें मजदूरों को तो रोजगार नहीं मिल रहा जिससे वह पलायव कर रहे हैं ।
इतना ही नहीं सरपंच सचिव के द्वारा जहां अपने सगे संबंधियों के नाम मस्टर रोल पर दर्ज कर उनको उनको मजदूर दिखा कर काम मशीनों से करा रहे उपरोक्त बैंक में ऐसे व्यक्तियों के खाते संचालित होने से सरपंच सचिव अपने घर बैठे ही मजदूरों के नाम की राशि का आहरण भी कर लेते हैं यह भी यह जांच का विषय है तो वही मजदूरों के द्वारा निर्माण कार्य में काम करते वक्त उनके भौतिक सत्यापन की जवाबदारी जनपद पंचायत के इस सेक्टर में पदस्थ उपयंत्री की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है लेकिन इस सेक्टर में पदस्थ उपयंत्री के द्वारा सेक्टर की सभी पंचायतों में देखा जाए तो मशीनों से पर निर्माण कार्य कराते हैं और भुगतान मजदूरों के नाम का कराते हैं वह भी बिना देखे भौतिक सत्यापन कर रहे हैं जिससे उपयंत्री की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं तो वहीं लोगों ने इस सेक्टर मे पदस्थ उपयंत्री के द्वारा निर्माण कार्य मैं उपयंत्री के द्वारा गड़बड़ी कराई जा रही है जिसके बदले में सिस्टम प्रक्रिया के तहत भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं जिससे उपयंत्री की संपत्ति की जांच कराने लोकायुक्त से जांच कराए जाने की मांग ग्रामीणों के द्वारा की गई है ।
तथा यह भी पता चला है कि
जनपद पंचायत पलेरा के अंतर्गत ग्राम पंचायत भगवानपुरा के सरपंच सचिव नवीन तालाब का निर्माण मनरेगा से कराया जा रहा है जिसकी स्वीकृति 2020/ 21 मैं स्वीकृत हुआ था जिसकी लागत 14 लाख 11 हजार 778 है यहां पर तालाब का कार्य मशीनों द्वारा कराया जा रहा है यहां पर ना तो तालाब का पटल बनाया गया है और लेबर के फर्जी मास्टर डालकर सरपंच सचिव द्वारा तालाब की पूर्ण राशि बंदरबांट की जा रही है जिससे प्रशासन से यहां की जनता ने मांग की है की सरपंच सचिव पर जांच कर कार्यवाही की जाए।

क्या कहते अधिकारी
इस संबंध में जनपद पंचायत पलेरा की सीईओ एम आर मीणा ने बताया कि अगर निर्माण कार्य में मशीन का उपयोग किया जा रहा है तो मैं मामले को अभी दिखाता हूं।

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