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मनरेगा का काम मशीनों से तहसीलदार ने मौके पर पकड़ा

बाल किशन प्रजापति जतारा (टीकमगढ़)
जनपद पंचायत जतारा की ग्राम पंचायत बर्मामाँझ मैं मनरेगा योजना के तहत तलैया का निर्माण ग्राम पंचायत के द्वारा कराया जा रहा था जिसमें दिखावे के लिए दिल में मजदूरों के द्वारा काम कराया जाता था रात्रि के समय जेसीबी मशीनों का उपयोग कर निर्माण कार्य कराया जा रहा था जिसकी शिकायत ग्रामीणों के द्वारा जतारा एसडीएम से की गई थी जिनके द्वारा मामले को गंभीरता से लेते हुए मौके पर एक जांच टीम भेजी गई तो वहां पर भगदड़ मच गई और कुछ ट्रैक्टरों को जस्टिन में पकड़ लिया जिन्हें दिगौडा पुलिस के हवाले किया गया जिसके बाद मामले ने नया रूप धारण कर लिया और सरपंच ने अपनी कमी छुपाने के लिए कुछ ऐसे किसानों को सामने ला दिया और उन्होंने नायब तहसीलदार पर मारपीट किए जाने का आरोप लगाया है।
बताते चलें कि

टीकमगढ़ जिले मैं अफसरशाही थमने का नाम नहीं ले रही है।
और आये दिन प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा किसानों के साथ मारपीट एवं दुर्व्यवहार किए जाने के मामले सामने आ रहे हैं ।कोरोनावायरस के चलते चल रहे लाँकडाउन के समय प्रशासनिक अधिकारियों का रवैया जनता के प्रति जिले में देखने को ठीक नहीं मिल रहा है एक किसान ने नायब तहसीलदार पर मारपीट किए जाने का आरोप लगाया है।
बताया कि जनपद पंचायत जतारा की ग्राम पंचायत वर्मामाँझ मनरेगा योजना के तहत तिलैया का निर्माण कार्य चल रहा है ।जिसकी जानकारी जतारा एसडीएम डॉक्टर सौरभ सोनबणे को सूचना मिली थी कि ग्राम पंचायत कुराई के गाँव वर्मामाँझ मैं मनरेगा योजना के तहत निर्माण कार्य में मजदूरों की जगह मशीनों से काम हो रहा है जिसकी जांच करने के निर्देश दिए थे जिसमें जनपद के अधिकारियों के साथ नायब तहसीलदार को शामिल किया गया था और रात्रि में 12:00 बजे के लगभग जांच टीम ग्राम पंचायत में जमीनी हकीकत जानने के लिए मौके की जांच करने के लिए ग्राम में गई हुई थी जहां पर जेसीबी मशीन चल रही थी ट्रैक्टरों के माध्यम से मिट्टी बरका दूसरे स्थान पर डाली जा रही थी लेकिन अधिकारियों के दल को देखकर मशीन मौके से भाग गई और ट्रैक्टर चालक मौके पर पकड़े गए जिसके बाद हंगामा खड़ा हो गया और मामला थाने तक पहुंच गया यह भी बताया जाता है कि
दिगौड़ा तहसील अंतर्गत ग्राम वर्मामाँझ में देर रात्रि के समय स्वयं के खेत पर काम कर रहे थे। तभी किसानों को दिगौड़ा नायब तहसीलदार ने पहले तो डंडों से बुरी से मारा और फिर दिगौड़ा थाने ले जाकर बन्द करवा दिया। जब इस मामले की सूचना मीडिया को हुई तो मीडिया के पूँछने पर नायब तहसीलदार किसानों को थाने में बंद कराने का कारण तक नही बता पाए और यह भी कबूल किया कि उक्त किसान खुद की जमीन पर खेती कार्य कर रहे थे। उल्टे किसानों को धमकाने लगे कि अगर कही कुछ बोला तो जमीन मामले में झूठे केस में फंसा देंगे।
इसी मामले में पीड़ित किसान निहाल सिंह घोष ने बताया कि दिन में तेज धूप रहने की बजह से बो रात में अपने बाकी 4 किसान साथियों के साथ अपने खेत को समतल करने का कार्य ट्रैक्टरों से कर रहे थे तभी नायब तहसीलदार पहुंचे और कहने लगे कि तुम लोग शासकीय योजना के कार्य मशीनों से कर रहे हो। और साथ ही किसानों को डंडों से मारने लगे।इसके बाद 100 डायल पुलिस को बुलाकर सभी किसानों को दिगौड़ा थाने में बंद कर दिया गया। लेकिन जब अगले दिन सुबह मीडिया ने नायब तहसीलदार से पूँछा की किस मामले में इन लोगो को बंद किया गया तो नायब तहसीलदार कारण बताने में असमर्थ रहे। किसानों के साथ अकारण ही ऐसी बर्बरता करने बाले अधिकारियों पर सख्त कार्यवाही की जानी चाहिए।
क्या कहते अधिकारी
इस संबंध में जतारा एसडीएम डॉक्टर सौरभ सोनबणे ने बताया कि ग्राम पंचायत में रात्रि के समय सरकारी निर्माण कार्य में मजदूरों की जगह जेसीबी मशीन का उपयोग किया जा रहा था जहां पर हमने जांच टीम भेजी थी जिसके बाद यह आरोप लगाए जा रहे हैं जबकि अधिकारियों के द्वारा किसी भी किसान के साथ कोई मारपीट नहीं की गई है।

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