बुंदेलखंड में लॉक डाउन और मजदूर पार्ट 2

डॉ नरेंद्र अरजरिया 9425304474 ……बुंदेलखंड में लॉक डाउन और मजदूर ….पार्ट 2 ……………बुझा हुआ चूल्हा थाली मैं कुछ अन्य के दानों से अपने पेट की भूख मिटाते मासूम नहीं जानते हैं की उनके मां-बाप के पास खिलाने के लिए बस इतना ही है यह तस्वीर बुंदेलखंड के जिले चित्रकूट के भरतकूप नगर के बुद्ध बस्ती की हैं जहां अधिकांश क्रेशर में काम करने वाले मजदूर रहते हैं इसी बस्ती की रहने वाली तीजा नाम की महिला कहती है कल बेटी पैदा हुई है घर में कुछ खाने को नहीं था मेरा पति ठेकेदार के पास भी गया था कुछ मांगने लेकिन वह मिला नहीं है तीजा बोलती कि उसकी मौसी रोटी और नमक लेकर आई थी तब हमारी भूख मिटी करोड़ों रुपए का टर्नओवर कराने वाली मजदूरों के घर जब बच्चा पैदा होते हैं उनकी मां को खाने के लिए कुछ नहीं होता है यह वह कड़वी सच्चाई है जिसे सुनकर के आपके भी रोंगटे खड़े हो जाएं इन मज़दूर बस्तियों में गर्भवती माताओं की हालत बहुत दयनीय है इस क्षेत्र की समस्याओं को लगाता उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता ………………अभिमन्यु भाई भी लगातार प्रयास करते रहते हैं अभिमन्यु भाई कहते हैं कि इनकी हालत देख कर के हम प्रशासन के सामने लगातार गुहार लगाते हैं प्रशासन को कुछ हद तक तो सुनता है जिनके पास बीपीएल राशन कार्ड थे उनको प्रशासन ने गेहूं और चावल उपलब्ध करा दिया है लेकिन सब्जी और मसाले के लिए उनके पास पैसे नहीं है मेरे द्वारा गरीबों के लिए किए जा रहे प्रयास को खनिज माफिया पचा नहीं रहे हैं उनको लगता है कि हम मजदूरों को भड़का रहे जबकि हमारा मुख्य काम है उनके अधिकार और उनको सुविधाएं दिलाने का प्रयास करना ……………मजदूर परिवारों की इसी दुर्दशा पर मुझे चार लाइन है याद आती है……….…………………साहब लोगों की कोठी पर कल फिर उसको जाना है
तवा नहीं है फिर भी उसको तन की भूख मिटाना है,
दो ईटों पर धरे फावड़ा रोटी सेंक रहा है
गीली लकड़ी सूखे आंसू फिर भी सेंक रहा है।

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