अनिल तिवारी, टीकमगढ़
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270 हितग्राहियों के विरुद्ध 292 पीएम आवास बनाने की धांधली जांच में खुल गई। इधर, नगर पालिका के जनप्रतिनिधियों ने सीएमओ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इसलिए भ्रष्टाचार में साठगांठ की आषंका बढ़ गई, जो जांच का विषय है। हद तो यह है कि सीएमओ के खिलाफ पार्षदों का आरोप-पत्र नगर पालिका टीकमगढ़ की ई-मेल आईडी से जारी किया गया है, जो कर्मचारियों की मिलीभगत को भी उजागर कर रहा है।

प्रधानमंत्री आवास योजना की षुरुआत वर्ष 2016 में नगर पालिका परिषद टीकमगढ़ में 270 आवासहीनों को आवास स्वीकृत किए गए थे। आवास निर्माण के लिए नगर पालिका ने ढोंगा पर बीड़ी मजदूर कॉलोनी के पास जमीन आवंटित की थी, लेकिन कर्ताधर्ताओं ने 270 की जगह 292 आवास रच दिए। हद तो यह है कि अतिरिक्त बनाए गए 22 आवासों में से 13 का जियो टैग भी किया जा चुका है। नवागत सीएमओ सुश्री माधुरी षर्मा द्वारा कराई गई जांच में फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ है। मामले में अन्य पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। आवास निर्माण में धांधली कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत का खेल बताया जाता है। भ्रष्टाचार उजागर होते ही जनप्रतिनिधि सीएमओ के खिलाफ मुखर हो गए हैं।

हितग्राहियों के पैसे से रच लिए 22 अधिक आवास

पीएम आवास योजना में हितग्राही द्वारा ही आवास निर्माण कराने का नियम है। नपा द्वारा हितग्राहियों को ले-आउट और नक्षा दिया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आवास स्वीकृत कराने का दबाव बनाकर कुछ चुने हुए जनप्रतिनिधियों ने हितग्राहियों से किष्त की राषि वसूलकर निर्माण की बागडोर खुद थाम ली। बीड़ी मजदूर कॉलोनी के पास 270 आवास बनाए जाने थे, लेकिन हितग्राहियों से पैसे ठेकेदारों ने 292 आवास बना दिए। अब अतिरिक्त 22 आवास कर्ताकर्धाताओं के गले की फांस बन गए हैं। इनमें से 13 जियो टैग किए गए आवासों की पड़ताल की जा रही है। वहीं बचाव में उतरे जनप्रतिनिधि स्वयं निर्माण बताने के लिए हितग्राहियों पर दबाव बना रहे हैं।

जांच हुई तो सीएमओ के खिलाफ उतरे जनप्रतिनिधि

इधर, 8 पार्षदों ने सीएमओ के खिलाफ कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन पर नगर के पार्षद अरविन्द्र श्रीवास्तव, रमजान खां, हर्ष मिश्रा, लक्ष्मी रैकवार, पार्वती अहिरवार, राजकुमार यादव, चांदनी बानो, शमीम साजिद खांन के हस्ताक्षर हैं। ज्ञापन के अनुसार जब से सीएमओ आई हैं कोई उत्कृष्ट कार्य नहीं किया गया है। नगर में लोगों को 5 से 7 दिन में पानी मिल रहा है। रोड लाइट न जलने और पार्कों में अंधेरा होने की शिकायत पार्षदों ने सीएमओ को दी, लेकिन कोई अमल नहीं हुआ। पार्षदों का आरोप है कि सीएमओ द्वारा एक लाख से कम के वर्कआर्डर जारी कर कुछ चुनिंदा वार्डों में काम कराए जा रहे हैं। पिछले वर्षों के अति आवश्यक काम रोके गए हैं। नगर की नालियां चोक होने से बारिश में मिश्रा तिराहा की मुख्य सड़क का पानी सड़कों पर आ रहा है। कॉलोनियों में बारिश के पानी के साथ ही नालियों का गंदा पानी भरा हुआ है।

धांधली ने छोड़े तमाम सवाल : किसके हैं अतिरिक्त आवास

सीएमओ के खिलाफ षिकायत बेषक जांच का विषय है, लेकिन धांधली उजागर होते ही पार्षदों की खिलाफत आवास निर्माण में जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल उठा रही है। तमाम आरोप सीएमओ पर दबाव बनाने से जोड़कर देखे जा रहे हैं। इसके साथ ही तमाम सवाल उठ खड़े हुए हैं, आवासों का निर्माण उपयंत्री की निगरानी में किया जाना था तो पहले अधिक आवास क्यों छुपाए गए ? जनप्रतिनिधियों द्वारा क्यों ठेके पर आवास बनवाए गए ? क्या अतिरिक्त 22 आवास जनप्रतिनिधियों ने अपने लिए बनवाए थे ? क्या जिम्मेदार इन्हें बेचने की फिराक में थे ? अतिरिक्त आवास में से 13 जियो टैग कैसे और किसे किए गए हैं ? सीएमओ के खिलाफ पार्षदों का आरोप पर नगर पालिका की ई-मेल आईडी से क्यों जारी किया गया? प्रधानमंत्री आवास निर्माण में धांधली के इस मामले में ऐसे ही तमाम सवालों के जवाब आना अभी षेष हैं। सूत्रों की मानें तो भ्रष्टाचार की बेल कर्मचारी-छुटभैयों से लेकर माननीयों तक फैली हुई है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार।

निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई होगी

270 की स्वीकृत के बावजूद 292 आवास निर्मित पाए गए हैं। 22 अधिक आवासों और 13 का जियो टैग के संबंध में सूचना सार्वजनिक की जा रही है। मामले में बिना किसी दबाव के निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई की जाएगी।

माधुरी षर्मा, सीएमओ, नगर पालिका टीकमगढ़

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