सुनील रिछारिया,हरपालपुर,mp,नगर के मेनरोड सर्किट हाउस के सामने रहने वाले कलयुगी पिता रामदास सोनी के पुत्र रविन्द्र सोनी उम्र 33 बर्ष की मौत मुंह के कैंसर के कारण रविवार की शाम 5:00 बजे हो गई थी। लड़के की राजपूत कॉलोनी स्थित किराए के मकान में मौत हो जाने के कारण नगर वासियों द्वारा उसकी अंतिम संस्कार के लिए उसके पिता रामदास सोनी को सूचना दी गई लेकिन रामदास सोनी द्वारा सुबह 8:00 बजे तक अपने पुत्र का शव लेने नहीं पहुंचे तो नगर वासियों द्वारा सामूहिक रूप से इकट्ठा होकर लड़की पक्ष एवं स्वर्णकार समाज के लोगों द्वारा मृत रविंद्र के शव को ले जाकर रविंद्र के पुराने घर में ले गए लेकिन रविन्द्र का शव बहन अर्चना और पिता रामदास ने लेने से मना कर दिया और घर का दरवाजा भी बन्द कर लिया इस पर बौखला कर नगर वासियों ने सामूहिक रूप से गेट खुलवाने की काफी कोशिश की लेकिन गेट नहीं खुलने पर गेट को जबरदस्ती खोला गया और रविंद्र के शव को रखने से पहले ही रविन्द्र की बहन अर्चना एवं पिता रामदास द्वारा रविंद्र के शव को घर में रखने का विरोध करने लगे इस पर मचे विवाद को लेकर जब हंगामा खड़ा होने लगा तो जांच के लिए आए एसआई गोटिया एवं आरक्षक द्वारा रामदास को थाने पहुंचने की सलाह दी। लेकिन लड़की अर्चना द्वारा हंगामा काटते हुए वह सीधे बस स्टैंड की ओर भागी और पिता रामदास ने थाने की शरण ली टी आई रामबाबू चौधरी द्वारा रामदास को समझाने का प्रयास किया गया फिर भी रामदास अपने पुत्र का अंतिम संस्कार करने के लिए तैयार नहीं हुआ इसकी जानकारी पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को भी दी गई 3 घंटे तक टी आई द्वारा समझाइश देने के बाद भी किसी भी कीमत पर अपने पुत्र का अंतिम संस्कार करने के लिए तैयार नहीं हुआ। टीआई राम बाबू चौधरी द्वारा सख्त लहजे में सामाजिक परंपराओं को पालन करने के लिए कहा गया उधर रामदास सोनी द्वारा सामाजिक रीतियों को दरकिनार करते हुए अंतिम संस्कार करने के लिए नहीं मान रहा था और गुस्साई भीड़ रामदास के खिलाफ बढ़ते आक्रोश को देखते हुए टीआई ने सख्त लहजे में अंतिम संस्कार कराने को कहा और अंततः पिता की खामियों के कारण कैंसर पीड़ित पुत्र के शरीर को पोस्टमार्टम के लिए भेजने के लिए जिम्मेदार मृतक रवींद्र को पिता के क्रोध का दंश झेलना पड़ रहा था।
मृतक रविंद्र के पिता रामदास सोनी का भी अपना अलग इतिहास है वह अपने पिता प्रेम नारायण सोनी से आए दिन मारपीट करते रहते हैं और बुढ़ापे में रमेश सोनी द्वारा उसकी संपत्ति हथिया लिए जाने और पिता को अपनी ही सम्पत्ति एवं घर से वंचित कर दिए जाने के कारण ट्रैक्टर चलाकर जीविकापार्जन का पालन करता रहता था।पिता की मौत के बाद पत्नी की अन्तेष्ठि में जब पुत्र रविंद्र अपनी मां को अंतिम विदाई देने के लिए घर आया तो उसकी बहन अर्चना एवं पिता ने उसके साथ मारपीट एवं अभद्रता की। लेकिन रविंद्र द्वारा मुक्तिधाम जाकर मां के फूलों को संचित कर अगस्त 2018 में अंतिम संस्कार पूर्ण किया। लेकिन अभागे रविंद्र को यह नहीं पता था अपनी शादी के सात बर्ष बाद वह अपनी पत्नी प्रियंका एवं साडे 4 वर्षीय पुत्री अनामिका एवं 10 माह की नन्ही दूध मुँही बच्ची धाया को छोड़कर इस संसार से चला जाएगा जमीन की आर्थिक स्थिति ठीक ना होने के कारण उसके कैंसर का इलाज टाटा मुंबई हॉस्पिटल एवं नवोदय कैंसर हॉस्पिटल भोपाल और हिमाचल में धर्मशाला में चला और उस इलाज का सारा खर्च उसके साले अनिरुद्ध जो कि भोपाल में रेलवे में कार्यरत है रविंद्र का संपूर्ण इलाज कराया लेकिन कुदरत के आगे एक न चली और इन 8 माह में ही रविन्द्र जिंदगी की जंग हार गया। अंत में काफी जद्दोजहद के बाद पीएम के उपरांत रविंद्र का अंतिम संस्कार किया गया फिर भी निर्दयी पिता का दिल नन्हे बच्चों पर नहीं पिघला और घर में रविंद्र की पत्नी एवं बच्चों को रखने को तैयार नहीं हो रहा है इस पर सामाजिक संगठनों द्वारा रामदास सोनी के इस कृत्य की भर्तस्ना की और रामदास सोनी के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग की।

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