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पिता,पुत्र बने कांग्रेस प्रत्यासी ।

मप्र : छिंदवाड़ा में पिता-पुत्र बने कांग्रेस के उम्मीदवार

संदीप पौराणिक
भोपाल, मध्य प्रदेश के इतिहास में यह पहला मौका है, जब पिता-पुत्र एक ही पार्टी से और एक ही जिले से, कांग्रेस के उम्मीदवार बने हैं। पिता जीतकर मुख्यमंत्री ही रहेंगे, मगर पुत्र जीते तो संसद में जाएंगे।

हम बात कर रहे हैं छिंदवाड़ा में लोकसभा के साथ होनेवाले विधानसभा उपचुनाव की, जहां मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके लाड़ले नकुलनाथ दोनों इस बार उम्मीदवार हैं। कांग्रेस ने गुरुवार को दोनों को उम्मीदवार घोषित किया है।

छिंदवाड़ा संसदीय क्षेत्र में मध्य छिंदवाड़ा लगभग साढ़े तीन दशक से कांग्रेस का गढ़ बना हुआ है। इस संसदीय क्षेत्र से कमलनाथ नौ बार चुनाव जीत चुके हैं। प्रदेश के गठन के वर्ष 1956 के बाद हुए चुनावों पर नजर दौड़ाई जाए तो एक बात साफ हो जाती है कि इस संसदीय क्षेत्र से अब तक सिर्फ एक बार 1997 में हुए उपचुनाव में भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा को जीत मिली थी।

इस संसदीय सीट से कमलनाथ नौ बार, गार्गी शंकर शर्मा तीन बार तो भीकुलाल चांडक, अलकानाथ व नारायण राव एक-एक बार कांग्रेस के सांसद रहे हैं।

कमलनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद सियासी हलकों में यही अंदाज लगाया जा रहा था कि छिंदवाड़ा संसदीय क्षेत्र से नकुलनाथ ही चुनाव लड़ेंगे। कमलनाथ स्वयं कई बार मंच से कह चुके थे कि अब संसदीय क्षेत्र का नेतृत्व नकुलनाथ के हाथों में होगा। अब कांग्रेस ने भी इस पर मुहर लगा दी है।

कमलनाथ पहले ही नकुलनाथ को कांग्रेस का संभावित उम्मीदवार बताते हुए कह चुके है कि “मुझ पर प्रदेश की जिम्मेदारी है, छिंदवाड़ा की जिम्मेदारी अपने बेटे नकुलनाथ को दे रहा हूं। इनको पकड़कर रखिएगा, काम न करें तो इनके कपड़े फाड़िएगा।”

वहीं नकुलनाथ ने स्वयं पिछले दिनों छिंदवाड़ा जिले के परासिया क्षेत्र के कांग्रेस कार्यकर्ताओं के संबोधित करते हुए कहा था, “छिदवाड़ा देश का एक ऐसा अकेला जिला है, जहां सातों विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक हैं, सांसद कांग्रेस से हैं, मुख्यमंत्री छिदवाड़ा क्षेत्र से हैं और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भी छिदवाड़ा के ही हैं। इतना ही नहीं, निकट भविष्य मे छिदवाड़ा का एक घर ऐसा होगा, जहां पिता-पुत्र एक साथ अपने-अपने पद के लिए प्रचार पर निकलेंगे और एक-दूसरे को वोट भी देंगे।”

छिंदवाड़ा से लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाए जाने के बाद नकुलनाथ ने कहा, “छिंदवाड़ा की जनता से हमारा पारिवारिक रिश्ता रहा है, कमलनाथ मुख्यमंत्री बन गए है और उनके पास छिंदवाड़ा के लिए ज्यादा समय नहीं है, उन्होंने अब यह जिम्मेदारी मुझे दी थी, अब यह भूमिका मैं पूरी श्रद्धा, निष्ठा, प्रेम और मेहनत के साथ निभाऊंगा। रोजगार के अवसर बढ़े, निवेश आए और अन्य सुविधाओं मे इजाफा हो, इस दिशा में काम किया जाएगा।”

छिंदवाड़ा संसदीय क्षेत्र से जहां नकुलनाथ को कांग्रेस ने उम्मीदवार बनाया है, तो उनके पिता कमलनाथ को कांग्रेस ने छिंदवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में होने वाले उपचुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया है। कमलनाथ के लिए छिंदवाड़ा के तत्कालीन विधायक दीपक सक्सेना ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। अब कमलनाथ इस विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने जा रहे हैं।

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक गिरिजा शंकर का कहना है कि राज्य में यह पहला मौका है, जब पिता-पुत्र एक साथ चुनाव लड़ रहे हैं। इससे पहले कई मौके ऐसे आए हैं जब पिता-पुत्र ने अलग अलग चुनाव लड़े हैं। इसके साथ यह भी तय हो गया है कि कमलनाथ मुख्यमंत्री भले पूरे प्रदेश के हों, मगर वे अपने को सबसे सुरक्षित छिंदवाड़ा में ही पाते हैं, इसीलिए विधानसभा का उपचुनाव भी छिंदवाड़ा से ही लड़ रहे हैं।

कमलनाथ जहां चार दशकों से देश की राजनीति में सक्रिय हैं, वहीं उनके पुत्र नकुलनाथ का अब सियासी मैदान में दाखिला हो रहा है। वैसे, वे पिता के लिए प्रचार तो दो दशकों से करते आ रहे हैं। अब वे चुनाव के जरिए सक्रिय राजनीति में आने वाले हैं।

नकुलनाथ वर्तमान में रामकांता प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड, शाका इस्टेट एवं फाइनेंस लिमिटेड, स्पन मोटल्स प्राइवेट लिमिटेड, मैग्नम कॉउंसलेटर प्राइवेट लिमिटेड सहित 20 से ज्यादा कंपनियों के निदेशक हैं। 21 जून, 1974 को जन्मे नकुलनाथ की स्कूली शिक्षा देहरादून के दून स्कूल में हुई। उन्होंने बोस्टर्न यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री हासिल की है।

पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने छिंदवाड़ा की सातों सीटों पर जीत दर्ज की थी। अब लोकसभा चुनाव और एक विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव है, कांग्रेस जहां अपना कब्जा बरकरार रखते हुए नया इतिहास रचने की कोशिश करेगी, वहीं भाजपा का जोर अपने जनाधार को बढ़ाने का रहेगा। यहां मतदान 29 अप्रैल को होना है।

–आईएएनएस

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