डॉ. राकेश द्विवेदी , उरई

बचपन में सभी बहनों से एकदम जुदा थीं साध्वी प्रज्ञा ठाकुर
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जालौन के परावर का रहने वाला है साध्वी का परिवार
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सन 2005 में धारण कर लिया था भगवा चोला
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह से साध्वी प्रज्ञा ठाकुर (राजावत) अब आमने -सामने की टक्कर होगी। भोपाल से चुनाव लड़ने को आरएसएस की इच्छा पर भाजपा साध्वी को दिग्विजय को सामने मैदान में लाया गया है।साध्वी के पिता डॉ चन्द्र पाल सिंह राजावत जालौन जिले के ग्राम परावर के मूल निवासी थे
। पहूज नदी के किनारे बसे गाँव में जब खेती से कोई खास उपज न मिलती दिखी तो वह मप्र के लहार जाकर बस गये। साध्वी को आतंकवादी बताये जाने के बाद पिता को ऐसा सदमा लगा कि 2013 में उनका निधन हो गया। साध्वी चार बहनें और एक भाई हैं।

यू पी के जिला जालौन में परावर पहूज नदी के किनारे बसा है। साध्वी के पिता डॉ सीपी सिंह यहीं के मूल निवासी थे। उन्होने आयुर्वेद की पढ़ाई की थी। गाँव की असुविधाओं के कारण एक वक्त ऐसा आया कि वह अपना गाँव छोड़कर लहार (भिंड) जाकर बस गये। यहाँ वह इलाज कर अपनी गृहस्थी चलाने लगे। यहीं उनकी दोस्ती डॉ गोविंद सिंह से हुई जो इस वक्त मप्र सरकार के सहकारिता मन्त्री हैं।दोनों के बीच की दोस्ती अभी तक प्रसिद्ध है। सीपी सिंह आरएसएस से जुड़े हुए थे।

डॉ सीपी के पांच संताने हुईं , जिसमें चार बेटियाँ और एक बेटा है । इनके नाम हैं – उपमा, प्रज्ञा,उत्तमा,पुष्पमित्र और प्रतिमा। यह एक सामान्य परिवार रहा। सभी बहनों में प्रज्ञा का स्वभाव बचपन से ही बिल्कुल अलग था।
जब किसी लड़की शादी के दौरान विदाई होती तो प्रज्ञा की प्रतिक्रिया अलग रहती। घर चलाने में बेटे को ही लायक मानने के वह खिलाफ थीं। यही से शायद उनके मन में विवाह न करने का विचार घर कर गया। सबसे छोटी बहन प्रतिमा ने बताया कि दीदी बालपन से ही स्वतंत्र स्वभाव की रही हैं। वह देश की सेवा को समर्पित हो जाना चाहती थी। छात्र जीवन से वह संघ की विचारधारा की ओर मुड़ गईं।एबीवीपी की सक्रिय सदस्य बनी।1997 में आरएसएस की दुर्गा वाहिनी की पूर्णकालिक सदस्य बनकर मंडल प्रमुख का दायित्व निभाने लगी। वह स्वामी अवधेशानंद से बहुत प्रभावित हुई और 2005 में हमेशा के लिये भगवचोला धारण कर लिया। भिंड से स्नातक करने के पश्चात बिलासपुर से बी पी एड का कोर्स पूरा किया पर उनका ध्यान अब पढ़ाई की अपेक्षा आध्यत्मिक ज्ञान की ओर बढ़ने लगा था। वह अच्छी वक्ता भी बन गईं। कुछ भाषण ऐसे भी थे जो काफी भड़काऊ माने गये पर इसी से उन्हें चर्चा भी मिली।
सन 2008 में अचानक सब कुछ बदल गया। 29 सितम्बर 2008 को मालेगाँव में एक धमाका हुआ जिसमें 7 लोगों की जान चली गई और 100 से ज्यादा घायल हुए। तब रमजान का महीना था ।मुसलमान मस्जिद में नमाज पढ़ने जा रहे थे। इस धमाके में वह मोटरसाइकिल भी मिली जिसे साध्वी ने एक वर्ष पूर्व बेच दी थी।

धमाके के पीछे कट्टर पन्थी हिन्दू संगठनों का हाथ होने का आरोप लगा था। कर्नल पुरोहित और साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का नाम सामने आया।तब दोनों जगह कांग्रेस की सरकारें थीं। भगवा आतंकवाद का शब्द इसी घटना के बाद प्रयोग में लाया गया था।
23अक्टूबर 2008 को साध्वी को एटीएस ने साध्वी को पूछताछ के लिये बुलाया उनको गिरफ्तार कर लिया गया। अदालत में दिए गये बयान में साध्वी ने एटीएस पर 23 दिनों तक प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। पिटाई से पेट और किडनी में दर्द उठा था। उनका लाई डिटेक्टर और नार्को एनेलिसस टेस्ट भी बिना अनुमति के कराया गया। एटीएस पर यह भी आरोप लगा कि वह इन टेस्टों के बहाने इस कोशिश में थी कि संघ से जुड़े किसी व्यक्ति का नाम सामने आये जिससे मामले को नया मोड़ दिया जा सके ।
2017 में सबूत के अभाव में साध्वी को जमानत मिल गई। इस मामले में प्रतिमा कहती हैं कि साध्वी को 23 दिनों तक बहुत प्रताड़ित किया गया। मैं अपने छोटे बच्चो के साथ उनसे मिलने जाते थे।पूरे दिन भूखे- प्यासे बैठे रहते थे पर बहन से किसी को नहीं मिलने दिया जाता था।
परिवार इस कदर तनाव में रहा कि वह बिखर गया।पापा सदमा बर्दाश्त न कर सके । बेटी पर आतंकवादी होने का आरोप लगने से वह गहरे सदमे में चले गये।2013 में उनका निधन हो गया। साध्वी की माँ श्रीमती सरला अब बेटियों के साथ रहकर अपनी जिन्दगी पूरा कर रही हैं।
प्रतिमा कहती हैं कि उनका परिवार संस्कारों में पला-बढ़ा है। इस तरह की भावना प्रज्ञा में भी कभी नहीं आ सकती कि वह बम धमाके जैसी योजना को अंजाम देने वाली साजिश में शामिल हो जायें। ऐसी सोच परिवार के आचरण के विरुद्ध है।इसीलिये मम्मी -पापा सहित पूरा परिवार परेशान हो गया।
परिवार की नाराजगी कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह को लेकर भी खूब है। प्रताडना के लिये उनके बयानों को भी दोषी माना जाता है। वह भोपाल से चुनाव लड़ रहे हैं। इसीलिये आरएसएस ने उनके खिलाफ कट्टर हिन्दू चेहरे के रूप में प्रज्ञा ठाकुर को उतरवाया है। प्रज्ञा की सभी बहनें चुनाव में प्रचार करने को उतर रहीं हैं।

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