छत्तीसगढ़ से साइकिल चलाकर माची पहुंचा युवक

बाल किशन प्रजापति जतारा (टीकमगढ़)

कोरोना वायरस महामारी के चलते मध्य प्रदेश के सैकड़ों लोग अलग-अलग राज्यों में आज भी फंसे हुए हैं वह घर आने का इंतजार कर रहे हैं लेकिन लोगों को कम ही सरकारी मदद नहीं मिल रही है जिसके चलते कोई पैदल तो कोई साइकिल से अपने गांव आ रहा है छत्तीसगढ़ राज के अंबिकापुर से एक सप्ताह में साइकिल का सफर तय कर अपने घर आए युवक दीपू सेन निवासी मांची करमौरा निवासी आंकाश यादब ने बताया कि वह महाराष्ट्र से अपने गांव करमौरा आया और स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान जतारा अस्पताल में न केवल सरकारी दावों की पोल खोली बल्कि उसने अपनी हकीकत बयान करते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य के अंबिकापुर के पास एक गांव में काम करता था जिससे वह अपना बा अपने परिवार का भरण पोषण कर जीवन यापन कर रहा था लेकिन को कोरोना वायरस के चलते देशभर में लांकडाउन होने के बाद काम धंधा बंद हो गया आर्थिक संकट छा गया घर आने के लिए कोई साधन नहीं था जिसके यहां काम करता था उसने कुछ दिन तो मदद तो रुके रहे लेकिन जब हालात वह खराब होते गए तो कराना है बेहतर समझा लेकिन सरकारी कोई मदद नहीं मिली पंजीयन भी कराया टोल फ्री नंबर पर भी संपर्क किया मगर कंट्रोल रूम के अधिकारियों ने फोन ही नहीं उठाई तब परेशान होकर साइकिल से अपने एक साथी के साथ खेतों और जंगल के रास्ते सफर तय कर बीती शाम को वह अपने गांव मांची आया लेकिन गांव में पहुंचने से पहले ही ग्रामीणों ने रोक लिया और कहा कि पहले जांच कराओ गांव में प्रवेश दिया जाएगा दीपू सेन नहीं भी अपना स्वास्थ्य परीक्षण कराने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जतारा पर आया और अपनी मुसीबत की दास्तान पत्रकारों को बताया की यही हालात आंकाश यादब ने बताया कि रास्ते में कुछ जगह पर समाजसेवियों ने मदद की और खाना उपलब्ध कराया जहां शाम हो गई वहीं किसी पेड़ की छांव में अपना आशियाना बना लिया सुबह हुई फिर चल दिए सुनसान सड़क मिली तो मुख्य मार्ग से आने के लिए मेन सड़क पर आने पर पुलिस की लाठी भी खानी पड़ी इससे फिर शॉर्टकट रास्ता ही अपनाकर अपने गांव आना बेहतर समझा जिससे साफ जाहिर होता है ।
कि शासन प्रशासन की तमाम दावों की पोल खुल रही है ।
ऐसे एक नहीं अनेकों श्रमिकों के साथ यह स्थिति निर्मित हो रही है अन्य राज्यों में फंसे हुए हैं ।सरकारी मदद के नाम पर अधिकारी दिखावा कर रहे हैं जिन राज्यों मैं फंसे हुए हैं वहां के अधिकांश प्रभारी अधिकारियों के मोबाइल बंद आ रहे हैं या चालू रहते हैं। तो वह फोन ही नहीं उठाते श्रमिक अपनी परेशानी नहीं बता पा रही ऐसे में वह अब अपनी उम्मीदें तोड़ कुछ पैदल तो कुछ अन्य साधनों का ही सहारा लेकर अब आने को विवश हो रहे हैं लेकिन सरकारी दावों की हकीकत भी सामने आ रही है। जिला प्रशासन के अधिकारी दिखावा कर रहे हैं।
मगर बाहर फसी श्रमिकों को कोई खास सुविधा उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं कि वह अपने घर आ सके लेकिन इतना जरूर है कि जब लाकडाउन के चलते अलग-अलग राज्यों में फंसे लोगों की हालात बुरे हैं इस समय हुआ है अपने घर आने के लिए शासन प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं लेकिन उनकी फरियाद कोई सुनने को तैयार ही नहीं है।

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