ओंकार सिंह की रिपोर्ट खजुराहो mp ,महागठबंधन में खजुराहो लोकसभा सीट सपा के खाते में गई है लिहाजा बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी का संयुक्त प्रत्याशी अब पुराने डकैत ददुआ के पुत्र वीर सिंह होंगे लखनऊ में राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और तमाम नेताओं की मौजूदगी में उनके नाम पर मुहर लग गई खबर आते ही सीमावर्ती उत्तर प्रदेश और खजुराहो लोकसभा में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है वीर सिंह का नाम फाइनल होते ही मुकाबला रोचक होने और खजुराहो लोकसभा सीट चर्चा में बने रहने की उम्मीद है क्योंकि वीर सिंह बाहुबली प्रत्याशियों में गिने जाते हैं

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट सदर के पूर्व विधायक ददुआ के बेटे वीर सिंह पटेल सपा के टिकट पर खजुराहो से लोकसभा चुनाव लड़ेंगें, लखनऊ में मंगलवार को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुलाकर उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी , वीर सिंह को लोकसभा चुनाव लड़ाने के पीछे कुर्मी वोट को साधना भी सपा का दांव है, बांदा लोकसभा सीट में सपा-बसपा गठबंधन से उद्योगपति श्यामाचरण गुप्ता,भाजपा से आरके पटेल, कांग्रेस से पूर्व विधायक के वीर सिंह के चाचा सपा सांसद रहे बालकुमार पटेल चुनाव मैदान में हैं साथ ही खजुराहो का चुनाव भी वीर सिंह पटेल के आने से दिलचस्प हो जाएगा और इसका फायदा भी आसपास की कई सीटों पर मिलने की उम्मीद है.

राजनीतिक परिचय

2005 में जिला पंचायत का पहला चुनाव, निर्विरोध सदस्य चुने गए और चित्रकूट जिला पंचायत अध्यक्ष बने।

2012 में पहला विधान सभा चुनाव लड़े चित्रकूट सदर विधान सभा और जीत दर्ज की,

2017 का विधान सभा चुनाव भी चित्रकूट से ही लड़े किन्तु भाजपा की आँधी में चुनाव हार गए थे। इस बार समाजवादी पार्टी ने बड़ा दांव खेलते हुए खजुराहो लोकसभा से टिकट दिया है

कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी कविता सिंह को बनाया है जो पन्ना जिले की बेटी और खजुराहो की बहू है राज परिवार से ताल्लुक रखने के कारण और उनके पति विक्रम सिंह विधायक हैं इस कारण से उन्हें मजबूत दावेदार माना जा रहा है ऐसे में सबसे ज्यादा चर्चा भारतीय जनता पार्टी की है क्योंकि खजुराहो लोकसभा भारतीय जनता पार्टी की सबसे सुरक्षित और भाजपा के पक्ष की सीट मानी जाती है ऐसे में अब तक भाजपा अपना प्रत्याशी तय नहीं कर पाई है यह सबसे ज्यादा चर्चा का विषय है क्योंकि इतने बड़े क्षेत्र में एक प्रत्याशी द्वारा प्रचार करने के लिए बहुत कम समय मिलेगा जब सपा और कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी तय कर लिए हैं ऐसे में भाजपा द्वारा खजुराहो सीट पर अपना प्रत्याशी ना तय कर पाना भी चिंता का विषय है क्योंकि यहां से भाजपा पिछली बार ढाई लाख वोट से अधिक अंतर से जीती थी और हमेशा से भाजपा ही जीती रही है जो दो हजार 18 में विधानसभा चुनाव हुए हैं उनके भी आंकड़े गिर जाए तो 90000 वोट से भाजपा इन लोकसभा की आठों विधानसभा में जीती है फिर भी प्रत्याशी तय कर पाना गंभीर चिंता का विषय है

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