कोरोना में कर्मवीर योद्धा पार्ट 4

कोरोना में कर्मवीर योद्धा पार्ट 4

कोरोना में बुंदेलखंड का कर्म वीर योद्धा (पार्ट 4) ………………………………………………ज्ञान की ज्योति जलाओ।
तुम आर्यभट्ट , बाणभट्ट और कौटिल्य भट्ट बनो।।
मातृभूमि के रन के अभिमन्यु बनो।
कभी पांडेय ,कभी आजाद ,कभी खुद स्वाभिमानी परशुराम बनो।।…………… यह पंक्तियां छतरपुर के इस कर्मवीर योद्धा पर लागू होती हैं जब आजादी का संघर्ष था तो पत्रकारों नेताओं का एक ही लक्ष्य था आजादी। स्वतंत्रता के बाद नेताओं का लक्ष्य बदल गया । पत्रकारिता अपनी उसी कर्मभूमि पर चलती रही । कोरोनावायरस के चलते लॉक डाउन में जहां नेता सैनिटाइजर से हाथ धोकर घरों में बैठे थे उसी समय बुंदेलखंड के विकासशील जिले छतरपुर में एक पत्रकार ने मानवीय पीड़ा को देखा जो खबरों से दिनभर जूझने के बाद उसने समाज सेवा और उन लोगों तक भोजन पहुंचाने का बीड़ा उठा लिया जो लॉक डाउन में पेट भरने को लालायित थे ऐसे ही बुंदेलखंड के कर्मवीर योद्धा का नाम है शीलवंत पचौरी ।…….… कारवां बनता गया………… संपूर्ण भारत में लॉक डाउनलोड होते ही महानगरों से बुंदेलखंड के मजदूरों का पलायन शुरू हो गया । सैकड़ों किलोमीटर की पैदल यात्रा के बाद जब मजदूर जिला मुख्यालय छतरपुर पहुंचे तो उनकी हालत गंभीर थी ना तो उनके पास खाने के लिए पैसे थे ना ही भोजन जो उनकी पीड़ा को देखा तो बस मन में विचार आया कि क्यों ना उस समाज की सेवा की जाए जो आज सबसे ज्यादा परेशान है इसी पीड़ा ने दिल को झकझोर कर रख दिया वह तारीख की 23 मार्च जब सीलबंद पचौरी ने अपने चार मित्रों के साथ मिलकर के राशन बांटने का निर्णय लिया पहले दिन इन चार मित्रों ने 14 परिजनों को राशन उपलब्ध कराया जिसमें हर परिवार को 7 दिन का राशन था इस अभियान में 24 तारीख को 15 लोग और जुड़ गए इस तरह अभियान में कुल 20 लोग शामिल हो गए और 50 पैकेट तैयार कराए जिसमें 5 किलो आटा 2 किलो चावल 1 किलो दाल 1 किलो शक्कर 500 ग्राम तेल और दो साबुन डिटॉल शामिल थे जिन्हें छतरपुर शहर के हनुमान टोरिया नारायणपुरा सौरारोड पर वितरित किया गया 26 मार्च आते-आते इस अभियान में शहर के 125 युवाओं की टीम बन गई शहर के गणमान्य नागरिकों और व्यापारियों ने जब इस टीम की कार्यशैली को देखा तो सब ने हाथ बढ़ाना शुरू कर दिया और इस टीम ने गरीब तबके के परिजनों तक 4500 किट भेज दी । लेकिन 29 मार्च को खाने के लिए सड़कों पर घूमते लोगों की दुर्दशा देखकर इस टीम ने शहर के साम्बी मंडपम में प्रतिदिन 2000 लोगों के लिए खाना पैकेट बनाना शुरू कर दिया जो महानगरों से मजदूर पहुंच रहे थे उनको खाना शुरू कर दिया जब ज्यादा लोगों की भीड़ बढ़ने लगी तो इस टीम ने शहर के 4 पॉइंट तय किए जहां पर खाना बनाना शुरु कर दिया जिसमें मंडपम के साथ-साथ चौपाटी गल्ला मंडी भी शामिल किए गए मंडपम में जहां 1600 लंच पैकेट प्रतिदिन तैयार हो रहे हैं तो वही चौपाटी पर 1000 लंच पैकेट गल्ला मंडी में 700 लंच पैकेट तैयार करना शुरू कर दिए और इनकी डिलीवरी सड़कों पर घूम रहे मजदूरों और घरों में दुबके बैठे गरीब तक के तक लोगो तक पहुंचाने के लिए यह टीम लगातार प्रयास कर रही है इस तरह ए टीम आज भी करीब 3000 लोगों को प्रतिदिन भोजन उपलब्ध करा रही है और इस टीम में 100 से अधिक युवा लोग हैं जो दिन रात मेहनत कर रहे हैं……… ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के लिए 300 थाली होती है तैयार … जिला मुख्यालय पर ड्यूटी कर रहे कर्मचारियों के लिए भी यह लोग प्रतिदिन 300 थाली लगाकर उनके स्थान तक पहुंचाते हैं जिसमें पुलिसकर्मी भी शामिल है थालियों को तैयार करा कर के… प्रतिदिन मीनू बदल करके पैक करके ड्यूटी स्थल पर कार्य कर रहे कर्मचारियों तक यह सभी लोग पहुंचाते हैं……………………खबर ने किया प्रेरित…………… पिछले 18 सालों से छतरपुर जिले की पत्रकारिता कर रहे शीलवंत पचोरी कहते हैं की लॉक डाउन के चलते 1 दिन खबर कवरेज करने के लिए निकले तो दिल्ली से आए मजदूरों की हालत देख कर के मन में बहुत पीड़ा हुई जो सैकड़ों किलोमीटर पैदल अपने बच्चों के साथ अपने अपने घर को जा रहे थे बस यही पीड़ा ने लॉक डाउन में लोगों तक भोजन पहुंचाने का ठान लिया हम चार दोस्तों ने इसकी शुरुआत की थी लेकिन शहर के गणमान्य और सभी लोगों का सहयोग मिलने के कारण यह कारवां 100 से अधिक लोगों का पहुंच चुका है शहर के लोग तन मन और धन से हम लोगों को सहयोग कर रहे हैं आज हम लोग करीब 3000 से ऊपर लोगों का प्रतिदिन भोजन दे रहे हैं इससे बड़ी और क्या जीवन में खुशी हो सकती है श्री पचौरी कहते हैं कि इस अभियान में श्रीप्रकाश चंद्र रावत, जावेद अख्तर मामू ,नसीम खान, मोहम्मद हमीद ,और सरदार हरविंदर सिंह वह लोग हैं जिन के सहयोग से यह सब संभव हो सका । जो इस अभियान को दिन रात मेहनत करके चला रहे हैं…….…… आपकी सभी टीम के सदस्यों को समर्पित 4 लाइने ………………………………………………ईश्वर सब के अंदर, रहता है विधमान l
मानव सेवा जो करे , दर्शन दें भगवान l
मंदिर जाओ या तुम, कर लो चारों धाम lबिन मानव सेवा के, अधूरे है ये काम ll
बिन मानव सेवा के, अधूरे है सब काम ll

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