सुनील रिछारिया,9425879071 हरपालपुर(छतरपुर)। थाना क्षेत्र के ग्राम पपटुआ में बीती रात बरसात के बीच एक बड़ी दुर्घटना सामने आई। यहां रहने वाले एक कुशवाहा परिवार केे घर के पीछे लगे ट्रांसफार्मर से तार टूट जाने के कारण पूरे खेत में करंट फैल गया। इस करंट में एक ही परिवार के पांच पुरूष चपेट में आ गए। इस बड़ी दुर्घटना में परिवार के दो नाबालिग चचेरे भाईयों की मौत हो गई जबकि तीन लोग बुरी तरह झुलस गए। अस्पताल में समय पर डॉक्टर न मिलने के कारण ग्रामीणों ने डॉक्टर पर शराबखोरी करने के आरोप लगाए और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र को आग के हवाले करने की कोशिश की लेकिन लोगों के समझाने पर गुस्साए ग्रामीण मान गए।
ऐसे हुई दुर्घटना
पपटुआ निवासी झगडू कुशवाहा के घर के पीछे एक ट्रांसफार्मर लगा है। पूरे गांव में लाइट थी लेकिन झगडू के यहां बिजली गायब थी इसलिए झगडू के पुत्र को लगा कि ट्रांसफार्मर से उसके घर का तार गिर गया है इसलिए उसका 12 वर्षीय पुत्र सुखनंदन तार देखने पीछे गया। ट्रांसफार्मर के बगल में एक लोहे की जाली पड़ी थी जिसमें करंट आ रहा था जैसे ही सुखनंदन का पैर इस जाली पर लगा करंट ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। उसकी आवाज सुनकर परिवार के अन्य लोग भागे, सबसे पहले सुखनंदन के चचेरे भाई 14 वर्षीय कमलापत ने उसे बचाने की कोशिश की और वह भी उस जाली से चिपक गया। बात में दोनों बच्चों को बचाने के लिए उसके पिता झगडू, चाचा रामदीन एवं झगडू का बड़ा बेटा रामप्रसाद भी पास गए तो वे भी इन्हें बचाने के चक्कर में करंट की चपेट में आ गए। देखते ही देखते यहां चीखें मच गईं और गांव के लोग इकट्ठे हो गए। बाद में गांव वालों ने लाठी-डण्डों की मदद से जाली से चिपके लोगों को दूर हटाया। गांव के लोगों ने बताया कि सुखनंदन की मौत मौके पर हो गई थी लेकिन कमलापत एवं अन्य लोग बेहोश थे। बेहोशी की अवस्था में इन लोगों को ट्रेक्टर पर रखकर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र हरपालपुर लाया गया जहां डॉक्टर नहीं मिलने के कारण कमलापत ने दम तोड़ दिया। अन्य लोगों को बीएमओ डॉ. अजय यादव के नौगांव से पहुंचने के बाद उपचार मिल सका। इसके बाद उन्हें जिला अस्पताल रिफर कर दिया गया।
मौत बच्चों की हुई लेकिन दम व्यवस्था ने तोड़ा
इस बड़ी दुर्घटना में देा बच्चों की जान चली गई। इस पूरी घटना की बिन्दुवार जानकारी लेने पर पता चलता है कि हमारी व्यवस्था किस तरह धराशायी हो चुकी है। करंट लगने के बाद घायलों को अस्पताल लाने के लिए ग्रामीणों ने कई बार डायल 100 और 108 को फोन लगाया लेकिन मौके पर कोई नहीं पहुंचा। आखिरकार घायलों को ट्रेक्टर पर रखकर अस्पताल लाना पड़ा। ग्रामीणों ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में पदस्थ ओमकार सिंह राय का मुख्यालय हरपालपुर है और उन्हें आकस्मिक स्थिति के लिए 24 घंटे ड्यूटी देने के लिए तैनात किया गया है लेकिन इतनी बड़ी घटना के बाद भी वे मौके पर नहीं पहुंचे। ग्रामीणों ने कहा कि वे अस्पताल के पीछे अपने दोस्तों के साथ शराबखोरी कर रहे थे। जब घायलों को बीएमओ अजय यादव ने नौगांव से आकर देखा तब उन्हें जिला अस्पताल भेजा जा सका।
अस्पताल में आग लगाने वाले थे ग्रामीण
12 और 14 साल के दो बच्चों की मौत से गुस्साए ग्रामीणों ने समय पर डॉक्टर न पहुंचने से नाराज होकर अस्पताल को आग के हवाले करने की कोशिश की। एक युवक स्कूटी से पेट्रोल निकालकर लेकर आया और आग लगाने ही जा रहा था कि उसे स्थानीय लोगों और मीडियाकर्मियों ने मना कर दिया। वरिष्ठ अधिकारियों को घटना की सूचना मिली तो हरपालपुर, अलीपुरा, गढ़ीमलहरा और नौगांव से भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और हालात पर नियंत्रण की कोशिश की। बहरहाल रविवार की सुबह मृृतकों का अंतिम संस्कार पुलिस की मौजूदगी में किया गया। एक ही परिवार के दो बच्चों की जान जाने के बाद भी इस परिवार से मिलने न तो कोई जनप्रतिनिधि पहुंचा और न ही प्रशासनिक अधिकारियों ने सुध ली। डॉक्टर के विरूद्ध भी अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है।

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