टीकमगढ़,मध्यप्रदेश में कांग्रेस को मिली पराजित का एक कारण यह भी सामने आया है की प्रशासनिक सर्जरी के चलते ऐसे अधिकारियों को जिले की कमान दे दी गई जिनके पास अनुभव नहीं था अनुभव की कमी के चलते वह मुख्यमंत्री द्वारा लिए गए निर्णय और जन हितेषी कार्यों को आमजन तक नहीं पहुंचा सके यहां तक कि वह अपने अधिकारियों से ही घिरे रहे और वातानुकूलित कमरों में बैठक कर समीक्षा करते रहे जबकि निचले स्तर पर कार्य करने वाले कर्मचारियों ने सीएम के जन हितेषी निर्णय को सही ढंग से असली जामा नहीं पहना पाए अगर हम बुंदेलखंड की 4 लोकसभा सीटों की बात करें तो वहां पर भी कांग्रेश को बुरी तरह हार का मुंह देखना पड़ा है टीकमगढ़ लोकसभा में जहां कॉन्ग्रेस साडे 300000 मतों से हारी है तो वही खजुराहो लोकसभा में 400000 मतों से यही हाल दमोह और सागर का भी रहा है ………मुख्यमंत्री की योजनाओं को जमीन पर नहीं उतार पाए अधिकारी ………मध्य प्रदेश खास करके बुंदेलखंड की 4 लोकसभा सीटों पर चुनाव हारने के बाद राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं की प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री ने ताबड़तोड़ ऐसे कार्य किए जो जन हितैषी थे लेकिन प्रशासनिक सर्जरी में कांगेस पार्टी चूक गई इन जिलों में ऐसे अधिकारी बैठा दिए गए जिनके पास अनुभव था ही नहीं नाही इन अधिकारियों ने मुख्यमंत्री की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचा पाया अधिकारी वातानुकूलित कमरों में बैठकर के अपने अधीनस्थों से योजनाओं की समीक्षा करते रहे जबकि निचले स्तर पर कार्य करने वाले कर्मचारी मौज मस्ती में व्यस्त रहें यही वजह रही कि बुंदेलखंड सहित मध्यप्रदेश में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया जबकि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने किसानों की बिजली हाथ जैसे निर्णय मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के तुरंत बाद लागू कर दिए थे अगर योजनाओं का सही क्रियान्वयन आम जन तक पहुचता तो कांग्रेस को सफलता मिलती अपनी कामयाबी को कांग्रेसी भी आमजन तक नहीं पहुंचा पाए जिसका सबसे बड़ा रोड़ा बने जिलों में बैठे अधिकारी कई जिलों में ऐसे अधिकारियों को कमान दे दी गई जिन्हें पहली पहली बार जिले का प्रभार दिया गया है जिनके पास ना तो अनुभव था ना ही प्रशासनिक क्षमता थी ऐसे में राज्य सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में नाकाम रहे इन अधिकारियों का ठीकरा कांग्रेस को भोगना पड़ा ………बुंदेलखंड के वरिष्ठ पत्रकार रविंद्र व्यास कहते हैं ………की खास करके बुंदेलखंड के सागर छतरपुर पन्ना दमोह टीकमगढ़ में ऐसे नवयुवक अधिकारियों को जिले की बागडोर दे दी गई जिनके पास काम का कोई अनुभव नहीं था जिसकी परिणति लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को देखनी पड़ी है उनका कहना है कि जब कोई सरकार योजनाएं लेकर आता है उसको जन-जन तक पहुंचाने में प्रशासनिक अधिकारियों की अहम भूमिका होती है लेकिन इन जिलों में बैठे नव सीखिए अधिकारियों ने कुछ नहीं किया यही वजह है यहां पर कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया मध्य प्रदेश कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मनीष श्रीवास्तव कहते हैं………… कि निश्चित ही युवा प्रशासनिक अधिकारियों के पास अनुभव की तो कमी होती है लेकिन उनमें नए विचार और ऊर्जावान भी होते हैं ऐसे में यह कहना की प्रशासनिक क्षमता कम होती हैं वह सही नहीं है अगर हम दोनों पहलू को देखें तो निश्चित ही अनुभव की कमी शासन की योजनाओं को जमीन पर लाने में अनुभव महत्वपूर्ण योगदान रखता है लेकिन जो युवा आईएएस आते हैं वह ऊर्जावान और नई टेक्नोलॉजी से परिपूर्ण होते हैं उनमें कुछ करने की क्षमता भी होती है….… छतरपुर कांग्रेस के जिला महामंत्री संतोष तिवारी कहते हैं कि निश्चित एक कारण यह भी है की मुख्यमंत्री की योजनाओं को अधिकारी असली जामा नहीं पहना सके वह भी मानते हैं की मुख्यमंत्री की योजना का प्रचार-प्रसार भी सही ढंग से नहीं हो पाया क्योंकि इतना समय नहीं मिल पाया जितना मिलना चाहिए था

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